Uttarakhand : पलायन ने पहाड़ों के स्कूलों की हालत खस्ता कर दी है। छात्र और शिक्षक संख्या की स्थिति चिंताजनक है। पर्वतीय इलाकों में प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। हालात यह है कि 3504 विद्यालयों में एक तो 1149 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। चंपावत व रुद्रप्रयाग जिले के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों की संख्या सबसे कम है। यह रिपोर्ट ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की है। पहली बार प्रदेश के प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिए सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी है। इसके साथ ही आयोग ने सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं। आयोग ने सरकार से कहा है कि इसपर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। आयोग ने कुछ सुझाव भी दिए हैं। शिक्षकों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन के अलावा उन्हें गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने की भी सिफारिश की है।
204 पेज की इस सर्वे रिपोर्ट में पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में स्कूली बच्चों व अध्यापकों की संख्या के अंतर का खुलासा किया है। बतादें कि प्रदेश में 12065 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 50 प्रतिशत स्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं है। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की घट रही संख्या का मुख्य कारण अध्यापकों की तैनाती न होना है।
गजब…263 स्कूलों में टीचर ही नहीं
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें बताया गया है कि प्राथमिक से माध्यमिक स्तर के 263 विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं है। इसमें 1 से 5 और 6 से 8 तक की कक्षाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर के 180 विद्यालय ऐसे हैं, जहां 242 शिक्षक मात्र एक-एक छात्र को पढ़ा रहे हैं। ऐसे स्कूलों की संख्या पौड़ी, अल्मोड़ा व टिहरी जिला में अधिक है। आप सोच सकते हैं, जिस स्कूल में अध्यापक ही नहीं हैं वहां दाखिला लिए बच्चों का भविष्य क्या होगा।
3504 विद्यालयों में एकल अध्यापक की तैनाती
प्रदेश में 3504 विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए एक अध्यापक तैनात है। इसमें पिथौरागढ़, पौड़ी, चमोली जिले में सबसे अधिक स्कूल हैं। इसके अलावा प्राथमिक से माध्यमिक स्तर की 8324 कक्षाओं में एकल छात्र संख्या है। यह स्थिति बेहद विकट है।
पर्वतीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दी जाए अतिरिक्त छूट
स्कूलों की दुर्दशा सुधारने के लिए आयोग ने उत्तराखंड सरकार को कई सुझाव दिए हैं। कहा, पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय अतिरिक्त छूट दी जाए। साथ ही कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षकों के लिए अलग से स्थानांतरण नीति बनाई जाए। इसके अलावा इन शिक्षकों को विद्यालय से 8 से 10 किमी. रहने की अनिवार्यता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन के तौर पर 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि व अन्य सुविधा दी जाए। नए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाए। विद्यालय के नजदीक आवास की सुविधा दी जाए। गैर शैक्षणिक कार्य न लिए जाएं। स्कूलों में प्रयोगशाला, शौचालय, खेल मैदान, चारदीवारी की सुविधा समेत कई सुझाव दिए हैं। आयोग का मानना है कि उच्च शिक्षा में बच्चों को छूट मिलने से अधिक से अधिक बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में आएंगे।
पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थिति प्राथमिक विद्यालयों में तत्काल सुधार का सुझाव दिया है। उन्होंने 1 से 5 कक्षा तक बच्चों की लगातार कम हो रही संख्या पर चिंता जताई। बतादें कि पहाड़ों पर स्थिति स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम है। इस मुद्दे पर अलग-अलग इलाकों के छात्र आंदोलन भी कर चुके हैं। लेकिन, इसका अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है।