PP Controversy : प्रयागराज में 2025 की शुरुआत में लगने वाले महाकुंभ से पहले अल्मोड़ा जेल में माफिया प्रकाश पांडेय उर्फ पीपी को मठाधीश बनाने से संत समाज में एक बवंडर मच गया है। अल्मोड़ा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पीपी पांडेय को पंच दशनाम जूना अखाड़े ने जेल में जाकर उन्हें यह पदवी दी है। साथ ही उन्हें नया नाम प्रकाशानंद गिरि भी दिया है। इसके बाद संत समाज में आलोचनाओं का दौर शुरू हुआ ही साथ में सोशल मीडिया पर भी कंमेट की बाढ़ आ गई। पीपी पर कई गंभीर आरोप हैं। हत्या और तस्करी के मामले में वह जेल में बंद है। इसके अलावा बताया जाता है कि वह दाउद इब्राहिम को मारने के लिए कराची तक गया था। नब्बे के दशक में वह दाउद से अलग हुए छोटा राजन के करीब आया। उसके बाद मुंबई में उसने कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया। बतादें कि पीपी का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई माफिया को अखाड़ों में इस तरह की पदवी दी जा चुकी है।
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करीब डेढ़ दशक पहले चर्चित महिला संत राधे मां को एक अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाने का विवाद खूब चर्चित रहा था। खुद को देवी बताने वाली सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां का विवादों से पुराना नाता था। वह भक्तों की गोद में बैठने तक के पैसे लेती थी। चार अप्रैल 1965 में पंजाब के जिले गुरुदासपुर के दोरंगला गांव में जन्मीं सुखविंदर कौर पति की खराब आर्थिक हालत के चलते मुंबई में दूसरे के घरों में काम करती थीं। महज 10वीं तक पढ़ी राधे मां की 17 साल उम्र में शादी हुई थी। कुछ साल पहले इन्होंने खुद को महंत घोषित कर दिया था। इनपर खुदकुशी के लिए उकसाने जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं। जब विवाद बढ़ा तो बाद में अखाड़े को राधे मां से किनारा करना पड़ा था।
2015 में प्रयारागज में निरंजनी अखाड़े बियर बार चलाने वाले सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाया था। सचिन दत्ता के ऊपर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। निरंजनी अखाड़े ने उनका नया नाम रखा सच्चिदानंद गिरि। यह मामला भी खूब सुर्खियों में रहा था। सचिन दत्ता को लोग बिल्डर बाबा और बियर बाबा के नाम से भी पुकारने लगे थे। इनके दीक्षा दिलाने के अवसर पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए थे, तत्कालीन सपा सरकार के कद्दावर मंत्री शिवपाल सिंह यादव भी उसमें शरीक हुए थे।
वहीं भाजपा के पूर्व विधायक रविदासाचार्य सुरेश राठौर को भी जब निरंजनी अखाड़े की ओर से अपने अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा की गई थी तो उस पर विवाद हो गया था। बाद में सुरेश राठौर और अखाड़े ने अपने आप को एक दूसरे से अलग कर लिया था।
पीपी मामले को लेकर संत समाज बेचैन
पीपी मामले को लेकर संत समाज में बेचैनी है। अखाड़े के शीर्ष महंतों ने इस मुद्दे से किनारा कर लिया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह मामला जूना अखाड़े का अंदरूनी मामला है। उनके संत ही इस बारे में कोई टिप्पणी कर सकते हैं। परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री और अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्री महंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि इस मामले का अखाड़े से कोई लेना देना नहीं है। अखाड़े के सचिव महंत महेश पुरी ने भी कहा कि अखाड़े का इस मामले से कोई सरोकार नहीं है।
संतों पर भी हो सकती है कार्रवाई
पीपी को जेल में दीक्षा देने वाले संतों पर भी जूना अखाड़ा कार्रवाई कर सकता है। अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी महाराज ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। सात वरिष्ठ संतो की समिति बनाई गई है। जांच में यह पाया गया कि उन्होंने किसी लालच अथवा पैसा लेकर किसी आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को दीक्षा दी है तो उन्हें अखाड़े से भी बाहर किया जा सकता है।
राजेंद्र गिरि ने कहा- कोई और भी आना चाहे तो स्वागत
पीपी पांडे को जूना अखाड़े में शामिल करने पर जहां संतों से जवाब देते नहीं बन रहा है वहीं उन्हें दीक्षा देने वाले जूना अखाड़े के थानापति महंत राजेंद्र गिरि अपने निर्णय पर अडिग हैं। उन्होंने तो अन्य लोगों को भी अपने साथ जुड़ने का खुला ऑफर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महंत राजेंद्र गिरि ने कहा कि वे जूना अखाड़े के महंत हैं। पीपी को दीक्षा देकर उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। कोई अगर गलत रास्ता छोड़कर धर्म के मार्ग पर चलना चाहता है तो उसे मौका दिया जाना चाहिए। कहा कि अपराध के शिकंजे में जकड़ा कोई और व्यक्ति भी अगर गलत काम छोड़कर धर्म-कर्म के रास्ते पर चलना चाहता है तो वे उसका भी स्वागत करेंगे।