धामी सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तराखंड में सड़क हादसा होने की दशा में 19 विभागों की जिम्मेदारी तय कर दी है। कैबिनेट ने प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। जल्द ही यह कानून का शक्ल ले लगा। बतादें कि राज्य में नौ साल बाद सड़क सुरक्षा नीति में बदलाव किया गया है। पूर्व की नीति में विभागों के काम निर्धारित नहीं थे। नई नीति में परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन विभाग समेत कई विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अब परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा संबंधी एक्ट भी बनाएगा, जिसके तहत लापरवाही पर संबंधित विभागीय अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। नई सड़क सुरक्षा नीति में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। स्कूलों में बच्चों को कक्षा एक से सड़क सुरक्षा पढ़ाई जाएगी। कॉलेज से लेकर आमजन तक जागरूकता के कार्यक्रमों पर भी जोर दिया गया है। साथ ही प्रदेश में सड़क हादसे रोकने के लिए पर्वतीय मागों पर सड़क किनारे पौधरोपण किया जाएगा।
इन विभागों की होगी यह जिम्मेदारी
आपदा प्रबंधन विभाग
दुर्घटना की तत्काल सूचना पुलिस व चिकित्सा विभाग को देना। राहत व बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ या एसडीआरएफ को सक्रिय करना। वाहन चालकों को लाइसेंस देने के लिए फर्स्ट एड की योग्यता भी अनिवार्य होगी
शिक्षा विभाग
प्रारंभिक कक्षाओं से ही सड़क सुरक्षा की शिक्षा, पाठ्यक्रम अपडेशन, शिक्षक, अभिभावकों, स्कूल बस, स्कूल वैन संचालकों, शिक्षा विभाग के अफसरों को जागरूक करना। एनएसएस, स्काउट गाइड व एनसीसी कैडेट्स को सड़क सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित करना। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा विभाग सभी छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों को सड़क सुरक्षा जागृति कार्यक्रमों से जोड़ना।
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लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, बीआरओ और सिंचाई विभाग
ग्रामीण व शहरी सड़कों का डिजाइन सुरक्षा, निर्माण के समय पैदल यात्रियों, अक्षम व्यक्तियों, दिव्यांगों व बच्चों के सुरक्षित चालन का ध्यान रखना। देश-विदेश में नगर नियोजकों, वास्तुविदों, यातायात इंजीनियरिंग के श्रेष्ठ मॉडल को देखकर राज्य की स्थिति के हिसाब से उपयोग करना। पर्वतीय मार्गो पर क्रैश वैरियर, ब्लैक स्पॉट व दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का त्वरित सुधार, सड़कों पर खोदाई, गड्ढे करने, सड़क किनारे भवन निर्माण सामग्री के भंडारण को लेकर लोनिवि को गाइडलाइन तैयार करनी होगी।
वन विभाग
वन्य जीवनों व सड़क यातायात प्रवाह के संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्रों में वाहनों की गति पर नियंत्रण के उपाय करना। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सूचना संकेतक लगाना। पर्वतीय मागों पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए सड़क किनारे वृक्षारोपण करना।

परिवहन विभाग
प्रवर्तन मजबूत करना। नेशनल, स्टेट हाईवे पर पेट्रोलिंग बढ़ाना, वाहन चालन कौशल में सुधार को लाइसेंसिंग प्रणाली को सशक्त व एआई का इस्तेमाल करना। भारी वाहन चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण, हल्के वाहन चालकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स शुरू करना। डीएल के लिए प्राथमिक चिकित्सा की योग्यता अनिवार्य होगी। समान श्रेणी के अपराध करने वालों पर कठोर कार्रवाई व काउंसिलिंग करना। वाहनों की फिटनेस जांच करना। प्रवर्तन को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट डिवाइस का प्रयोग करना। एकीकृत नगरीय परिवहन प्रणाली विकसित करना। इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को प्रोत्साहित करना। दुर्घटना प्रभावितों को राहत राशि वितरित करना।
पुलिस
यातायात नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करते हुए कठोर कार्रवाई व फेसलैस चालान करना। दुर्घटनाओं के कारण व विश्लेषण के लिए एकीकृत सड़क दुर्घटना डाटाबेस को मजबूत करना। प्रशिक्षण देना। ट्रैफिक स्वयंसेवक, जूनियर ट्रैफिक फोर्स, ट्रैफिक वार्डन व एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित करना। विभिन्न अकादमिक व अनुसंधान संस्थाओं में यातायात सुरक्षा पर सम्मेलन आयोजित करना।
आवास, शहरी विकास एवं स्थानीय निकाय
सड़क किनारे का अतिक्रमण हटाना। ऐसे होडिंग व वस्तुएं हटाना जी वाहन संचालन के समय चालक की एकाग्रता को भंग करते हों। पैदल यात्रियों के सुगम संचरण के लिए फुटपाथ का अतिक्रमण हटाना। नगरीय क्षेत्रों में पार्किंग बनाना। आवारा पशुओं से दुर्घटना रोकने के लिए पशुशालाएं बनाना। उचित स्थानों पर सड़क संकेत चिन्ह, रोड मार्किंग, स्ट्रीट लाइट लगाना।
स्वास्थ्य विभाग
चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों को दुर्घटनाओं के उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित करना, गोल्डन आवर का महत्व समझाना, एयर एंबुलेंस सेवा तंत्र को शामिल करते हुए आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करना, नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे के साथ लगने वाले अस्पताल व ट्रामा केंद्रों को संपन्न करना, प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी परिवहन व पुलिस के सहयोग से फर्स्ट रिस्पांडर तक पहुंचाना, केंद्र की योजना के तहत दुर्घटना के घायलों को निशुल्क कैशलेस उपचार देना।

अन्य विभाग
आवकारी विभाग शराब पीकर वाहन संचालन को हतोत्साहित करेगा। जिला प्रशासन हिट एंड रन मामले के तहत प्रभावितों को समयबद्ध आर्थिक सहायता देने के साथ ही जिला सड़क सुरक्षा समितियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा उपाय करेगा।
एआरटीओ के दस नए पद सृजित किए जाएंगे
चारधाम यात्रा व पर्यटकों की आवाजाही के मद्देनजर एआरटीओ प्रवर्तन के 10 नए पद सृजित करने पर कैबिनेट ने मुहर लगाई। पहले से विभाग में एआरटीओ के 32 पद सृजित हैं। लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में प्रवर्तन की सख्त कार्रवाई की जरूरत के मद्देनजर नए पद सृजित करने का निर्णय लिया गया है।