योगी सरकार के आठ साल… गोरखपुर से सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को जब 2017 में मुख्यमंत्री बनाया गया तो कई लोगों ने उनकी प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाया। सवाल लाजिमी भी था। क्यों कि वह केंद्र में भी कभी मंत्री नहीं रहे। इसलिए लोगों को संदेह हो रहा था। इस बात को आठ साल बीत चुके हैं। आठ साल पूरे होने पर योगी सरकार प्रदेश भर में जश्न मना रही है। अपनी उपलब्धियों को बता रही है। उपलब्धियों-आलोचनाओं के बीच उनके तमाम विरोधी भी खुलकर तो नहीं कहते लेकिन, वह मानते हैं कि कानून व्यवस्था सुधरी है। इसका बड़ा कारण उनका अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति है।
योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में 8 साल पूरे होने के मौके पर विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में बताया कि 2017 से 2025 के बीच पुलिस के साथ मुठभेड़ में 222 माफिया मारे गए और 8,118 घायल हुए। इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले आठ सालों में गैंगस्टर एक्ट के तहत 79,984 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 930 अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई होगी तो जाहिर है कि संगठित अपराध में कमी आएगी ही। इसका श्रेय सीएम योगी को दिया जाना चाहिए।
अपराधियों की चार हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कुर्क
सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा में जो रिपोर्ट पेश की उसके मुताबिक, पिछले आठ साल की अवधि में माफियाओं और अपराधियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित 4,076 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई। इसके अलावा, 27,178 महिला पुलिसकर्मियों सहित 2,16,450 पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई। इसमें यह भी बताया गया कि पिछले आठ साल में सरकार ने पुलिसिंग में कई नई पहल की हैं। जिनमें अपराध विश्लेषण, अपराध डेटा पोर्टल, महत्वपूर्ण अपराध निगरानी पोर्टल, फील्ड यूनिट पोर्टल और जांच, तथा पुलिस परेड पोर्टल शामिल हैं। यहां बताया गया कि आने वाले दिनों में पुलिस द्वारा जनता को अधिक जानकारी देने के लिए एक जांच अधिकारी ऐप (आईओ ऐप) लाने की संभावना है, जैसे कि किसी मामले की स्थिति या समन जारी करना।
बुलडोजर एक्शन… देश भर में चर्चा
विकास दुबे, कानपुर वाला। यह तो सबको याद ही होगा। आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे के घर पर सबसे पहले बुलडोजर एक्शन हुआ था। इसके बाद योगी सरकार ने जितने भी दुर्दांत अपराधी थे उनकी कमर तोड़ने के लिए बुलडोजर का सहारा लेना शुरू किया। प्रयागराज में अतीक अहमद के बेटे ने जब 24 फरवरी 2022 को दिनदहाड़े अधिवक्ता उमेश पाल को गोलियों से भून दिया इसके बाद योगी सरकार की कार्रवाई पूरे देश के लिए नजीर बन गई। इसी बाबत सीएम का विधानसभा में दिया गया बयान, मिट्टी में मिला दूंगा, आज तक लोगों की जुबां पर बैठ गया। अतीक, उसके बेटे असद, भाई अशरफ समेत उसके दर्जनों गुर्गों के घर गिरा दिए गए। दर्जनों एनकाउंटर हुए। इससे पूरे देश में उनकी छवि सख्त शासक की बनी। पदाधिकारियों ने यह भी दावा किया कि 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत में कानून और व्यवस्था के नैरेटिव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने आदित्यनाथ की सख्त मुख्यमंत्री की छवि बनाने में भी मदद की। उनकी सभाओं में लोग बुलडोजर से पहुंचने लगे।
महाकुंभ से मनवाया प्रबंधन का लोहा…
कानून व्यवस्था के अलावा अगर विकास की बात करें तो उसमें भी सीएम योगी खरे साबित हुए। अयोध्या, काशी, प्रयागराज जिस तरह देश-विदेश में पर्यटन क्षेत्र के रूप में उभरा वह अभूतपूर्व है। करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु इस तीनों जगहों पर जा रहे हैं। इसके लिए योगी सरकार ने इंफ्रास्ट्रचर पर खूब निवेश किया। हालांकि, यहां पर केंद्र सरकार की भूमिका भी काफी बड़ी रही। प्रयागराज महाकुंभ की बात किए बिना सीएम योगी की उपलब्धियां अधूरी रहेगी। दुनिया का सबसे बड़ा मानव समागम। 66 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। जिस तरह से इंतजाम थे। पूरी दुनिया में उसकी सराहना हुई। देश-विदेश की कई बड़ी यूनिवर्सिटी इस पर अध्ययन कर रही है। आखिर एक ऐसा शहर जिसे महज महीने दो महीने के लिए तैयार किया जाता है। वहां पर इतनी बड़ी संख्या में लोग आकर चले जाते हैं। कुंभ पहले भी होते रहे हैं। लेकिन, पिछले दो कुंभ में जिस तरह योगी सरकार ने ब्रांडिंग की वह पहले नहीं हुई थी।
योगी कई बार यह बात कह चुके हैं कि धर्म से अर्थ का बड़ा गहरा नाता है। वह कहते हैं कि अध्यात्म अपनी जगह है। राज्य के विकास की बात करें तो हमने करीब 7.5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे। महाकुंभ से राज्य की अर्थव्यवस्था को साढ़े तीन लाख रुपये से ज्यादा फायदा पहुंचा। इससे फायदे का सौदा और क्या होगा?
इसके अलावा योगी सरकार की उपलब्धियों पर बात की जाए तो भारत की कुल मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग में 45 प्रतिशत योगदान यूपी का है। यानी, मोबाइल कंपनियों की पहली पसंद यूपी बन चुका है। जहां कुछ साल पहले कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा था। इसलिए बड़ी कंपनियां यहां आने से कतराती थी। इसके अलावा देश में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में ही हैं। यूपी में 6 एक्सप्रेसवे संचालित हैं। 11 पर काम चल रहा है।