किन्नर अखाड़े से महामंडलेश्वर की पदवी मिलने के बाद छिड़े विवाद पर फिल्म अभिनेत्री Mamta Kulkarni (श्रीयामाई ममतानंद गिरि) ने कहा कि वह पिछले 12 साल से कठोर ब्रह्मचर्य में हैं। तपस्या के बाद दीक्षा ली है, लाइमलाइट में आने के लिए नहीं। शनिवार को किन्नर अखाड़ा शिविर में पत्रकारों से ममता ने कहा, निभाना कठिन है। संन्यास लेना कोई फैशन नहीं है। कुछ को मेरी यह अवस्था देखकर दुख हो रहा होगा। अंडरवर्ल्ड से जुड़े विवादों से जुड़े सवाल को टालते हुए कहा कि मां सीता को भी अग्निपरीक्षा देनी पड़ी थी। ममता ने कहा, शायद यह उनके पिछले जन्म का प्रारब्ध था, जो अब वह यहां तक पहुंची हैं।
कहा, उनकी दादी से आदि शक्ति ने सपने में आकर उनका नाम यामाई रखने को कहा था। यामाई का मतलब मृत्यु की मां है। कहा, यामाई मां का दर्शन करने के बाद उन्होंने बालीवुड में प्रवेश किया था। अब उन्हीं यामाई मां को अपने नाम के साथ जोड़ा है। किन्नर अखाड़े से जुड़ाव पर कहा, यहां रहन-सहन पर कोई पाबंदी नहीं है। जूना अखाड़े में भी उनकी बात चली थी, लेकिन मुंडन की शर्त के चलते शामिल नहीं हुई। वहीं, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर टीना मां ने कहा, सनातन की परंपरा हमारे यहां कोई भी आ सकता है।
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हम लिंग भेद, जाति भेद नहीं मानते हैं। ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने के विरोध में उतरे शांभवी पीठ के पीठाधीश्वर श्री स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा- किन्नर अखाड़े को मान्यता देकर पिछले कुंभ में महापाप हुआ था। कुंभ का मजाक बनाने का प्रयास हो रहा है। ममता का नाम बहुत बड़ा है। ये लोग उसके नाम पर व्यापार करेंगे। ममता का विषय बहुत घातक और धर्म के खिलाफ है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा, ‘ममता को बहुत-बहुत आशीर्वाद और साधुवाद। वैराग्य कभी भी आ सकता है। वहीं, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि का कहना है कि संन्यास का अधिकार सबको है।
ममता के नाम पर व्यापार करेंगे
वहीं, शांभवी पीठाधीश्वर श्री स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कहा, ‘किन्नर अखाड़े को मान्यता देकर पिछले कुंभ में महापाप हुआ था, जिस प्रकार की अनुशासनहीनता हो रही है, वो बहुत घातक है। ये सनातन धर्म के साथ एक धोखा है, छल है। मैंने ममता से कहा- इन लोगों के जाल में मत पड़ो। स्त्री के लिए संन्यास नहीं है। तमाम ऐसी परंपरा है, जिसमें तुम विरक्त होकर रह सकती हो। उन्होंने कहा कि ऐसी जगह न गिरो कि लोग तुम्हारे ऊपर थूकें। किन्नर अखाड़े को लोग मजाक में ले रहे हैं। वहां ज्ञान भक्ति की बात नहीं हो रही। कुंभ का मजाक बनाने का प्रयास हो रहा है। जब-जब अधर्म होगा, तब-तब मैं बोलूंगा। ममता का नाम बहुत बड़ा है। ये लोग उसके नाम पर व्यापार करेंगे। ममता कुलकर्णी का विषय बहुत घातक और धर्म के खिलाफ है।
हमारे यहां एक वैश्या को भी गुरु बनाया गया था
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरि जी महाराज ने कहा, ‘किन्नर अखाड़ा 2019 में रजिस्टर्ड हुआ था। वो जूना अखाड़े की एक शाखा है। उनको एक हिंदू परंपरा में जोड़ने के लिए श्री महंत जी महाराज ने अखाड़े में शामिल किया था। जब कोई अखाड़ा पूर्ण रूप से बन जाता है, तो उनको पावर है कि वो किसी को महंत, साध्वी या महामंडलेश्वर बनाएं। वो कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। इसमें कोई भी पुरुष, महिला या किन्नर कोई भी पदवी प्राप्त कर सकते हैं। हर अखाड़े के अपने मापदंड होते हैं।उन्होंने कहा- देश के किसी विद्वान, राष्ट्रहित में कार्य करने वाले, अध्यात्म में या सामाजिक कार्य करने वाले को संन्यासी अखाड़े महामंडलेश्वर पद की उपाधि से विभूषित कर देते हैं। फिल्म अभिनेत्री बनना कोई दोष तो नहीं है। हमारे यहां एक वैश्या को भी गुरु बनाया गया था, इसलिए यहां योग्यता से किसी को भी महामंडलेश्वर बनाया जा सकता है।
महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया क्या है
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरि बताते हैं- सबसे पहले अखाड़े में महापुरुष, अवधूत, महंत, श्री महंत बनता है। फिर अखाड़ा ये देखता है कि उस व्यक्ति का कितना योगदान है, राष्ट्र में धर्म प्रचार का कितना काम किया है। उस आधार पर ही आगे फैसला लिया जाता है। कोई व्यक्ति आए, संन्यासी बनने की घोषणा करे और हम डायरेक्ट उसको महामंडलेश्वर बना दें, ऐसी परंपरा जूना अखाड़े की नहीं है।